जनपद बरेली मीरगंज: क्षेत्र में गेंहू की फसल 50 प्रतिशत कट चुकी है। फिर भी सरकारी गेंहू क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। किसान गेंहू उठाकर सीधे मंडी में ले जाकर बेच रहे हैं। मंडी में गेंहू समर्थन मूल्य से अधिक रेट में खरीदा जा रहा है। राशन कार्ड कटने की आंशका के चलते भी किसान क्रय केंद्रों पर जाने से बच रहे हैं।
क्षेत्र में किसान गेंहू की लगभग 50 प्रतिशत फसल काट चुके हैं। मीरगंज में चल रहे खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर अब तक केवल 210 कुंतल गेंहू की खरीद हुई है। कई दिनों से कोई किसान गेंहू लेकर केंद्र पर नहीं आया है। सहकारी समिति में खुले क्रय केंद्र पर ताल लटके हैं। मंडी में गेंहू 2100 प्रति कुंतल से अधिक दाम में बिक रहा है, जबकि सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर 2015 रुपये प्रति कुंतल दाम है। मंडी में दाम तो अधिक मिल ही रहा है साथ ही पंजीकरण, सत्यापन और टोकन का झंझट भी नहीं है। तौल का खर्चा भी नहीं देना पड़ रहा है। केवल ऐसे किसानों की फसल खेतों में खड़ी है जो भूसे की बढ़ी कीमतों के बाद फसल थ्रेसर से गहाने का इंतजार कर रहे हैं। यह किसान गेंहू काटने को मजदूरों के घरों के चक्कर काट रहे हैं। गांव अम्बरपुर के देवेंद्र शर्मा ने बताया दो दिन पहले उन्होंने मिलक मंडी में अपना 115 कुंतल गेंहू 2150 रुपयों में बेचा। इसी गांव के रामगुलाम ने मंडी 95 कुंतल गेंहू 2130 रुपये प्रति कुंतल में बेचा। मंडी में तौल होते ही रुपये किसान को मिल जाते हैं। खाद्य विभाग के क्रय केंद्र प्रभारी रजनी सिंह ने बताया किसान गेंहू लेकर केंद्र पर नहीं आ रहा है। अभी तक 210 कुंतल गेंहू की ही खरीद हुई है।
सरकारी क्रय के गेंहू की तौल न कराने का एक कारण राशन कार्ड निरस्त होने का डर भी है। कई बड़े किसानों के भी राशन कार्ड बने हुए हैं। राशन कार्ड से माह में दो बार मुफ्त खाद्यान्न मिल जाता है। ऐसे किसान अपनी उपज क्रय केंद्र पर नहीं ले जा रहे हैं। किसानों का कहना है तौल कराने पर उनकी जमीन और पैदावार के बारे में प्रशासन को पता चल जायेगा। ज्यादा गेंहू बेंचने पर प्रशासन उनको संपन्न मानकर राशन कार्ड निरस्त कर सकता है।
बीते वर्षों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोग अनाज की व्यवस्था करने के लिए गेहूं कटाई की मजदूरी करते थे। अब सरकार कोटे की दुकानों से महीने में दो बार मुफ्त अनाज दे रही है। मुफ्त अनाज मिलने से खाद्यान्न जुटाने की चिंता नहीं करनी पड़ती। ऐसे में गांवों में गेंहू कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। गांव चुरई दलपतपुर के राशिद अली ने बताया गेंहू कटाई को 40 किलो बीघा देने पर भी कटाई वाले नहीं मिल रहे हैं।
संवादाता डॉक्टर मुदित प्रताप सिंह की रिपोर्ट
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